गो० श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी

वंशी प्रेमावतार प्रेमस्वरूप रसिकाचार्य अनन्त श्री हित हरिवंश चंद्र महाप्रभु जु जो की निकुंज में श्री जुगल जोड़ी के अनंत प्रेम स्वरूप निज सखी श्री हित सजनी जु है । श्रीहित हरिवंश महाप्रभु जु श्रीजी की कृपा से धराधाम में रसिक संतों के कल्याण एवं अनन्य भक्तों को हित रसोपासना के सागर में डुबकी लगवाने के लिए प्रकट हुए । “ हित की यहाँ उपासना हित के हैं हम दास , हित विशेष राखत रहे चित नित हित की आस “ श्रीहित हरिवंश महाप्रभु जी एकमात्र संत हुए जिनका जन्म ब्रज में बाद ग्राम में हुआ ।

जब श्रीहित जु महाराज श्री राधावल्लभ लाल जु को लेकर श्रीधाम वृंदावन पधारे तब वृंदावन एक सघन वन था लता पता से घिरा हुआ , डाकू और जंगली जानवर के डर से वृंदावन कोई साधू संत रहते नहीं थे , उन्होंने श्रीहित राधावल्लभ लाल जी को सघन वन में लता पता के मध्य कुंज की स्थापना कर श्रीहित राधावल्लभ लाल जु को लाड लड़ाया ।

श्रीहित हरिवंश महाप्रभु जी ने छह : माह में ही श्रीजी की कृपा बल से श्री राधासुधानिधि ग्रंथ की रचना कर दिए जिनको लिपिबद्ध उनके ताऊ जी श्री नरसिंहश्रम जी ने किए । श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने रसोनपासना का गुड़ निकुंज रस प्रसादी अन्य ग्रंथों में प्रदान किए - श्रीहित चौरासी जी , श्री स्फुट वाणी , श्री यमुनाकटाक्ष एवं अनन्या रचनाओं से रसिकों को निकुंज प्रेम रस की प्राप्ति करवाई जो की ब्रह्मा शुक आदि को भी दुर्लभ है।

Jai Jai Shri Radhavallabh
गो० श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी
ठा० श्री हित राधावल्लभ लाल जू

ठा० श्री हित राधावल्लभ लाल जू

निभृत निकुंज विलासी अनन्य कोटि ब्रह्मांड के नायक ठा॰ श्री हित राधावल्लभ लाल जु को शंकर जी ने अपने इष्ट श्रीहित राधावल्लभ लाल जी की कई कोटि कल्पों तक अपने कैलाश पर्वत में सेवा की , अपने भक्त के अपने सबसे प्रिय को मांगने पर श्री राधावल्लभ लाल की कृपा अपने भक्त पर प्रदान की ।

जिनकी युगल प्रेम स्वरूप श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी वृंदावन में शंकर जी की विधिवत रीति से श्री राधावल्लभ लाल जी को सेवा एवं लाड़ लड़ाया ।

ये परंपरा आज भी राधावल्लभ लाल जी मंदिर में श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी के वंशजो द्वारा विधि पूर्वक ठाट बाट से लाड़ लड़ाया जाता है । मंदिर के गर्भ गृह में केवल श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी के वंशज श्रीहित कुल के आचार्य स्वरूप ही प्रवेश एवं श्रीजी की निज सेवा की अनुमति है ।

आचार्य श्री हित निमिष गोस्वामी जी महाराज

श्री राधावल्लभ संप्रदाय के प्रतिष्ठित आचार्य श्री हित निमिष गोस्वामी जी महाराज, एक गौरवशाली और दिव्य आचार्य परंपरा के संवाहक हैं। महाराज जी सुप्रसिद्ध आचार्य श्री हित प्रमोद चंद्र गोस्वामी जी महाराज के पौत्र तथा श्री हित आचार्य श्री हित मनमोहन लाल गोस्वामी जी महाराज के सुपुत्र हैं। इस प्रकार महाराज जी पीढ़ियों से चली आ रही ब्रज-भक्ति और रसरीति का रास पान कराते हैं।

महाराज जी, भगवान श्रीकृष्ण के बंसी (वंशी) अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु के वंशज हैं। श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने ही वृन्दावन धाम में विश्वविख्यात श्री राधावल्लभ मंदिर की स्थापना की थी तथा स्वयं श्री राधावल्लभ लाल की अष्टयाम सेवा के द्वारा निरंतर आराधना की। उसी रसरीति के अनुसार आज भी श्री राधावल्लभ लाल जी को श्रद्धा एवं विधिपूर्वक अष्टयाम सेवा अर्पित की जाती है।

श्री हित कुल वंश परंपरा के 19वें आचार्य के रूप में श्री हित निमिष गोस्वामी जी महाराज, अपने पूर्वज आचार्यों द्वारा स्थापित रसरीति , उपासना और सिद्धांतों का पूर्ण निष्ठा के साथ पालन कर रहे हैं। उनके आचार, विचार और उपदेशों में ब्रज की माधुर्य भक्ति, सरलता और रसिक परंपरा की स्पष्ट झलक मिलती है।

इसके अतिरिक्त, महाराज जी “वृन्दावन महिमामृत” की दिव्य एवं रसपूर्ण कथाओं के वर्णन के माध्यम से भक्तों को ब्रजधाम की महिमा, राधा–कृष्ण की अलौकिक लीलाओं और प्रेम-भक्ति के गूढ़ रहस्यों से परिचित कराते हैं। उनके उपदेश न केवल आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हैं, बल्कि साधकों को प्रिया–प्रियतम श्री राधावल्लभ लाल जी की निष्काम सेवा और भक्ति के पथ पर अग्रसर करते हैं।

महाराज जी के करुणामय मार्गदर्शन, सरल स्वभाव और आध्यात्मिक प्रेरणा से आज देश–विदेश में हजारों श्रद्धालु लाभान्वित हो रहे हैं। इसी कारण उनके अनेक शिष्य और अनुयायी हैं, जो उनके सान्निध्य में रहकर ब्रज-भक्ति और रसरीति का पालन कर रहे हैं।

आचार्य श्री हित निमिष गोस्वामी जी महाराज

श्रीजी के चरणकमलों पर समर्पित सेवा मनोरथ

Services devoted at Shri Radhavallabh lal ji's Lotus Feet

Eight-Times Service Ritual

अष्टयाम सेवा पद्धति

श्री हित राधावल्लभ लाल जू मंदिर विश्व का एकमात्र मंदिर है जहाँ नित्य अष्ट पहर अष्टयाम सेवा होती है।श्री राधावल्लभ लाल जू के 7 आरती एवं 5 भोग नित्य होती है।

सेवा/आरती का नाम
समय (Time)
मंगला आरती
प्रात: 5:30 बजे से 6:15 बजे तक
धूप आरती
सुबह 9:15 बजे से 9:30 बजे तक
श्रृंगार आरती
सुबह 9:45 बजे से 10:30 बजे तक
राजभोग आरती
दोपहर 12:30 बजे से 1:15 बजे तक
उत्थापन आरती
शाम 5:30 बजे से 5:45 बजे तक
संध्या आरती
शाम 6:00 बजे से 6:45 बजे तक
शयन आरती
रात्रि 8:30 बजे से 9:00 बजे तक

राधावल्लभी संप्रदाय के अन्य मुख्य मंदिर

Other Major Temples of the Radhavallabha Sampradaya

बाद ग्राम

बाद ग्राम

Baad Gram, Mathura

सेवा कुंज

सेवा कुंज

Sewa Kunj, Vrindavan

मानसरोवर

मानसरोवर

Mansarovar, Mant Gram

कामवान

कामवान

Kamyavan Temple

रास मंडल

रास मंडल

Raas Mandal, Vrindavan

श्री राधा नवरंगी लाल जी

श्री राधा नवरंगी लाल जी

Shri Navrangi Lal ji

Devotional Moments

उत्सव मालिका

Relive the divine celebrations of Vrindavan through these spiritually uplifting highlights.

logo
Shri Radha Vallabh Lal
logo
Shri Radha Vallabh Lal
logo
Shri Radha Vallabh Lal
logo
Shri Radha Vallabh Lal
logo
Shri Radha Vallabh Lal
Swipe to explore