श्रीहित मंगल गान
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- November 28, 2025
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|| श्रीहित मंगल गान ||
श्री हित सेवक जी (दामोदर जी ) कृत
जै जै श्रीहरिवंश, व्यास-कुल-मंडना |
रसिक अनन्नयनी मुख्य गुरू, जन भय खंडना ||
श्रीवृन्दावन वास, रास रस भूमि जहां |
क्रीडत श्यामा-श्याम, पुलिन मँजुल तहां ||
पुलिन मंजुल परम पावन, त्रिविध तहां मारुत बहे |
कुंज भवन विचित्र शोभा, मदन नित सेवत रहै ||
तहां संतत व्यासनंदन, रहत कलुष विहंडना |
जै जै श्रीहरिवंश, व्यास-कुल-मंडना ||१||
जै जै श्रीहरिवंश-चन्द्र उदित सदा |
द्विज-कुल-कुमुद प्रकाश, विपुल सुख संपदा ||
पर उपकार विचार, सुमति जग विस्तरी |
करुणा-सिंधु कृपालु, काल भय सब हरि ||
हरि सब कलि काल की भय, कृपा रूप जु वपु धर्यौ |
करत जे अनसहन निन्दक, तिनहुँ पै अनुग्रह करयौ ||
निरभिमान निर्वेर निरुपम, निष्कलंक जु सर्वदा |
जै जै श्रीहरिवंश-चन्द्र उदित सदा ||२||
जै जै श्रीहरिवंश, प्रसंशित सब दुनी |
सारासार विवेकित, कोविद बहु गुनि ||
गुप्त रीति आचरन, प्रगट सब जग दिये |
ज्ञान-धर्म-व्रत-कर्म, भक्ति-किंकर कीये ||
भक्ति हित जे शरण आये, द्वंद दोष जु सब घटे |
कमल कर जिन अभय दीने, कर्म-बंधन सब कटे ||
परम सुखद सुशील सुंदर, पाहि स्वामिनि मम धनी |
जै जै श्रीहरिवंश, प्रशंसित सब दुनी ||३||
जै जै श्रीहरिवंश, नाम-गुण गाइ है |
प्रेम लक्षणा भक्ति, सुद्रढ करि पाइहै ||
अरु बाढे रसरीति, प्रीति चित न टरे |
जीति विषम संसार, कीरति जग विस्तरै ||
विस्तरै सब जग विमल कीरति, साधु-सँगति न टरै |
वास वृन्दाविपिन पावै, श्रीराधिका जु कृपा करै ||
चतुर जुगल किशोर सेवक, दिन प्रसादहि पाइ है |
जै जै श्रीहरिवंश, नाम-गुण गाइहै ||४||
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|| बधाई गान ||
मधुरीतु माधव मास सुहाई |
भाग प्रकाश व्यास नन्दन मुख ,
फूल्यौ कमल अमल छबि छाई ||
श्रवत मधुर मकरंद सुयश निज ,
कुंज-केलि-सौरभ सरसाई |
सेवत रसिक अनन्य भ्रमर मन ,
‘कृष्णदास’ सुख सार सदाई ||
|| गुरु वंदना ||
नमो नमो जय श्रीहरिवंश |
रसिक अनन्य वेणु कुल मंडन,
लीला मान सरोवर हंस ||
नमो जयति श्रीवृन्दावन सहज माधुरी,
रास विलास प्रशंस ||
आगम-निगम अगोचर राधे,
चरण सरोज व्यास अवतंश ||
रसिकवर श्री हरिराम व्यासजी कृत
|| श्री सेवकचरण वंदना ||
प्रथम श्रीसेवक पद सिर नाउ,
करहु कृपा श्री दामोदर मोपै,
श्रीहरिवंश चरण रति पाउ ||
गुण गंभीर श्री व्यासनंदनजू के,
तुव परसाद सुजस रस गाउ |
नागरीदास के तुमही सहायक,
रसिक अनन्य नृपति मन भाउं ||
|| रसिकवर श्री नागरीदासजी कृत ||



