चंदन उत्सव के पद
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- November 30, 2025
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चंदन उत्सव के पद
गो० श्री कमल नैन जी महाराज कृत ( जैसाख सुदी तीज, अक्षै तृतीया) से
राग सारंग –
चंदन की बोली तन गोरें ॥
मलयागिरि सि मेलि अगरमत लेपन करत स्याम मन भोरें ॥
सुभ्र पटीर कपूर मेलि घम कंचुकि स्याम अङ्ग चित चोरें ।
केशरि चंदन खौरि भाल रचि चंदन को वैदा बवि जोरें ॥
अंग अंग अभरन रवि चंदन के रंग रंग थानि की दुति दोरें ।
जै श्री कमल नैंन हित तन मलकनि लखि पलक न लगत ललक नहि थोरें ॥ १ ॥
गो० श्री रूपलाल जी महाराज कृत-
राग सारङ्ग –
चंदन चित्र विचित्र विराजें ।
रचि रचि सरस सुगंधि बनाये अलि लंपट सुख साजै ॥
मुकट चंद्रिका नील पीत पट तन दुति मनमथ लाजैं ।
जै श्री रूपलाल हित प्रति अनुरागिनि सरस समाजें ॥२॥
राग सारङ्ग-
मूरति स्याम की मन मानी |
चंदन चित्रित स्याम मनोहर प्रिया रूप रस सानी ||
वंशीवट यमुना तट कुंजनि केलि वेलि लपटानी ।
जै श्री रूपलाल हित ललित त्रिभंगी रंगी रंग विकानी ||३||
गो० श्री किशोरीलाल जी महाराज कृत—-राग सारङ्ग
हरि चंदन चोली तन वनीं ।
वाम भाग वृषभानु नंदिनी तातें छवि बाढ़ी घनीं ॥
सीतल छाँह लता ग्रह बैठे सारंग गावत धन धनीं ।
जै श्री किशोरीलाल हित रूप मिथुन मुख ललिता-दिक लखि सुख सनीं ॥४॥
गो० श्री हित गोवर्धनलाल जी महाराज कृत – राग गौरी
चंदन चित्रित अङ्ग बनाये ।
चंदन की चोली श्रंग पहिरें चंदन वागे दुहुँनि सुहाये ||१||
चंदन खौरि लिलाद विराजै भूषन चंदन मन भाये |
चंदन को छिरकाव कियौ है छूटत फुहारे चंदन छाये ||२||
चंदन वीजन हाथ लियें मखि करत दुहूं के मोद बढ़ाये |
चंदन अतर सुगंधी छूटे चंदन के बँगला जु छवाये ||३||
पान दॉन चंदन कर लीने ललिता सखी तमोल लगाये |
चंदन चौरि लियें कर माहीं जें श्री हित गोवर्धन नैंन काये ||४||५||
श्री ध्रुवदास जी महाराज कृत – राग सारंग
वंशीवट मूल खरे दंपति अनुराग भरे,
गावत हैं मारंग पिय सारंग वर नैनी ।
उमहि कुँवर करति गान सिखवति प्रिया विकट तान,
सप्त स्वर सौं मधुर मधुर लेति कोकिल बैनी ॥
चित्रित चंदन सु थंग भूषन फूलनि सुरंग,
दसन वसन सहज रङ्ग वैशरि छवि दैनी ।
लमत कंठ जलज माल वदन स्वेद कन रसाल,
दीरघ वर लोचन मषि रेख वनीं पैंनी ॥
चहुँ दिसि सखियन की भी सकल प्रेम रस अधीर,
उभय रूप राग रंग सुख अनूप लेनी ।
उमग्यौ जल प्रेम नैंन रहित भये रसन चैन,
इहिं गति रह्यो मत्त चित्त हित ध्रुव दिन रेंनी ॥ ६ ॥
सवैया –
ग्रीष्म की रितु जानि सहेलिनु कंज कपूर की कुंज बनाई |
चंदन चंद के खंभ रचे दल कोमल रंग सुरंगनि बाई ||
उज्वल सेज सुरंग सुहावनी वारि गुलाव सौंले बिकाई । रा
जत है ध्रुव लाड़िली लाल विनोद को मोद वढ्यो अधिकाई ॥७॥
श्री मोहनदास जी महाराज कृत – राग सारंग
चंदन की कुंज तामैं चंदन को बँगला चंदन की चौकी



